Monday, 22 June 2020

राजपूत नव निर्माण

सगळा राजपूत समाज ने म्हारी तरफ सु खम्मा घणी जय माताजी की,जय रघुनाथ जी की,जय श्री कृष्ण। मैं राजपूत नव निर्माण नामक ब्लॉग पर आपका स्वागत करता हूँ। राजपूत समाज धरती का सबसे अहम और मुख्य समाज। राजपूत समाज से ही धरती के अन्य समाज का विकास हुआ या प्रादुर्भाव हुआ।
राजपूत समाज जोकि धरती का रक्षक और लाचार गरीब और नारी,गौ का रक्षक। वो समाज जिसने अपने सीस कटवा दिए। जिस समाज ने सदैव मातृ भूमि की रक्षा में अपना सर्वश्व न्योछावर कर दिया। राजपूत समाज जिसने अपने सीस की कीमत को सदैव गोरवान्वित किया।
वो राजपूत समाज जिसने अपने मान मर्यादा और वीरता से सदैव अजय इतिहास लिखे।
राजपूत समाज को 36 कौमी समाज आज भी अपना रक्षक मानता हैं। आज भले 21 सदी का वर्तमान चल रहा हैं। लेकिन आज भी जनता में राजपूत समाज की अपनी पैठ हैं।
भले राजपूत आर्थिक रूप से पिछड़ा हो सकता हैं। लेकिन अगड़ा समाज भी राजपूत हैं। बड़े बड़े किलो और हवेलियों से लेकर गांव में बणियोडा झूपो में भी राजपूत समाज आन बान और मान सु आपरी जिंदगी जिये।
आज भी राजपूत समाज मे सभी प्रकार री रीतियों और नीतियों माथे काम करन वाला शूरवीर और दूरदृष्टि  सपूत हुए हैं आगे भी पैदा  होते जाएंगे। राजपूत समाज में सतिया और भोमिया बन कर इतिहास में आज भी अजर अमर हैं।
राजपूत समाज मे राजा महाराजा और वीर पुरुषो के साथ साथ राजपूत समाज की नारी का भी अपना विशेष योगदान हैं।
जब जब राजपूत समाज मे राजपूत पुरुषो के इतिहास के गुणगान होते हैं तब तब राजपूत समाज की नारियो के भी गुणगान की विशेष अपनी पहचान हैं।
जब जब युद्ध होते थे तब तब राजपूत समाज की नारियो ने पुरुषो को सबल प्रदान किया। कायरता से दूर अग्नि को अपने आप को होम कर राजपूत सिरदारो को युद्ध मे काल बनकर दुश्मन पर टूटन का साथ दिया हैं।
आज 21 सदी में देश विदेशो से करोड़ो सैलानी राजपूतो के किलो और राजपूतो की मर्यादाओ और परम्पराओ और संस्कृति व राजपूती मान और वीरता के किस्सों को सुनने हिंदुस्तान आते हैं। राजपूत सिर्फ हिंदुस्तान में ही नही विश्व के हर कोने में बड़ी शान से अपना जीवन उत्तम इतिहास लिख कर जी गए और जी रहे हैं।
राजपूत समाज न सदैव 36 समाज को अपना मानकर उनके लिए सदैव ढाल बनकर लड़ते और रक्षा करते रहे और करते रहेंगे।
राजपूत समाज 36 समाज का सदैव आदर और सत्कार करता हैं। राजपूत समाज कभी भी 36 समाज की इज्जत पर आंच नही आने देता हैं और न आने देगा।
आज भी राजपूत समाज सदैव गॉंव गवाड़ से लेकर नगर नगरो में अपने गौरव को भलीभाँति संजोये हुए हैं।
राजपूत समाज से ही अन्य समाजो का जन्म हुआ हैं। आज आप और हम देखते हैं कि 36 समाज भी आज भी अपने बड़े और विशेष कार्यक्रमो में अपने बैनर और अन्य जगहों पर क्षत्रीय समाज को लगता हैं। भले वो किसी समाज से तालुकात रखते हो ।
राजपूत समाज मे कुदरत की देन हैं कि राजपूत समाज भले कितना भी गरीब हैं लेकिन वो सम्पूर्ण समाज के लिए जरूर सोचेगा।
राजपूत समाज आज भी अपने विशेष अदब और साहस पर कायम हैं। जन्म से ही एक राजपूत में रक्षा का खून दौड़ता हैं। राजपूत सिर्फ आन बान और शान के लिए अपना सर्वश्व न्योछावर कर देता हैं।
मैं आज अपने आपको धन्य समझता हूँ। मुझे राजपूत समाज मे जन्म मिला। हमारा फर्ज हैं। कि राजपूत समाज की मान और मर्यादा को संजो कर रखना हैं। हर कदम पर किसी भी काम को करते यह अहसास रखना हैं कि मैं राजपूत परिवतर का हिस्सा हूँ।
राजपूत कभी किसी समाज का बुरा नही समझता कारण की सभी समाज अपने हैं। पेड़ की जड़ो से हर साख अलग थोड़े ही हैं।
आज भी जब जब राजपूत समाज के साथ 36 समाज कही भी इक्क्ठा होता हैं। तो बहुत अच्छा लगता हैं। सम्पूर्ण 36 समाज के साथ राजपूत समाज जब चलता हैं तो एक फर्ज की अनुभूति होती हैं कि हम सब एक हैं और सबकी रक्षा करते हुए इस दुनिया से रुक्सत होना हर राजपूत के लिए गर्व की बात हैं।

No comments:

Post a Comment